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Showing posts from January, 2022

शिक्षा के अलख

  शिक्षा का अलख जगाओ ★★★★★★★★★★ अंधकार को दूर कराकर, उजियाला फैलाओ जी। बच्चों में विश्वास जगाकर, शिक्षा का अलख जगाओ जी। नामुमकिन को मुमकिन कर, काम सफल कर जाओ जी। बच्चों को नई राह दिखाकर , शिक्षा का अलख जगाओ जी। अज्ञानी को ज्ञानी बनाकर, शिक्षा का महत्व बताओ जी। समाज को शिक्षित कराकर, शिक्षा का अलख जगाओ जी। असभ्य को सभ्य बनाकर, जीने का ढंग बताओ जी स्वच्छता का संदेश देकर, शिक्षा का अलख जगाओ जी। अंधविश्वास दूर भगाकर, शिक्षा की चिंगारी जलाओ जी। राष्ट्र का निर्माण कराकर, शिक्षा का अलख जगाओ जी। ◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆◆ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना (छत्तीसगढ़) मो. 8120587822

गीत - रक्षाबंधन

        गीत - रक्षाबंधन ★★★★★★★★★★★ सावन के इस पुण्य पर्व ने, मन में प्रीत जगाई है। अक्षत कुमकुम दीप सुमन से, थाली आज सजाई है। ★★★★★★★★★★★ टूट नहीं पाता वह बल है, इस रेशम के बंधन में। भाल सजा देती है बहना, रोली कुमकुम चंदन में। बहना को भाई से अतुलित, इस राखी में प्यार मिले। बचपन की यादें है जिसमें, पावन वह संसार मिले। जब वापस जाती हैं बहना, नैना तब भर आई हैं। अक्षत कुमकुम दीप सुमन से, थाली आज सजाई है। ★★★★★★★★★★★ अगर बहन आ नही सके तो, भाई को दुख होता हैं। आँसू नहीं बहाता पर वह, मन ही मन में रोता है। बहना भी अपने भैया बिन, सुखी कहाँ रह पाती हैं। भैया के बारे में सोचकर, बहुत व्यथीत हो जाती हैं। यह दोनों में इक दूजे की, जीवन की परछाई है। अक्षत कुमकुम दीप सुमन से, थाली आज सजाई है। ★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

जय कन्हैया लाल की

    जय कन्हैया लाल की ★★★★★★★★★★ कान्हा के बंशी के धुन में , गोपियाँ की मन भा गई। लीलाएँ  करने को कान्हा, सब के दिल में छा गई। ★★★★★★★★★ बाल सखा के संग रहकर, माखन खूब वह खाये है । गोकुल नगरी धाम में कान्हा, सभी गोपियों को नचाये  है। ★★★★★★★★★ माखन चोरी करता कान्हा , गोपियाँ तंग हो जाती थी। माता यशोदा ने उनको तो, कान जोर खिंच लाती थी । ★★★★★★★★★★ नंद के दुलारे  कान्हा, पावन जिसकी पालकी, प्रेम से मिलकर बोलो, जय कन्हैया लाल की। ★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

गीत माखन चोर

      माखन चोर ★★★★★★★ जिसकी मधुर मुरलिया सुनके, गोकुल में नित भोर हुआ। लीलाएँ  करने को कान्हा, ब्रज का माखन चोर हुआ। ★★★★★★★★★★★ बाल सखाओ के संग कान्हा, अनुपम रिश्ता जोड़ा है। बना पिरामिड मित्रों संग, माखन की मटका तोड़ा है। चोरी जब पकड़ी जाती तब, सजा सुनाई जाती थी। मातु यशोदा कान्हा को फिर, उँखल से बंधवाती थी। कान्हा के तन पर जो लिपटा, धन्य सदा वह डोर हुआ। लीलाएँ  करने को कान्हा, ब्रज का माखन चोर हुआ। ★★★★★★★★★★★ भूल नही सकते जग वाले, कान्हा के अवदानों को। सरल सहज जिसनें तोड़ा, सब दंभी के अभिमानों को। ब्रज वालों के तन मन में जब, बल बुद्धि संचारण की। और सभी के रक्षक बनकर, गोवर्धन को धारण की। जब वासव के क्रोध अगन से, ब्रज में दुख घनघोर हुआ। लीलाएँ  करने को कान्हा, ब्रज का माखन चोर हुआ। ★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

गीत झूठे भी मिल जाते

  गीत - झूठे भी मिल जाते हैं ★★★★★★★★★★★ जिनके आडम्बर से नित ही, तन मन भी हिल जाते हैं। सत्यवादियों की बस्ती में, झूठे भी मिल जाते हैं। ★★★★★★★★★★ कभी किसी को मिले तरक्की, मन ही मन यह जलते हैं। छूट कपट के हथियारों से, तब उस जन को छलते हैं। भले योग्य ये नहीं रहे पर, पद पर दावा करते हैं। दूजों को लड़वा संतन बन, नित्य छलावा करते हैं। बदले का मन भाव लिए, हद से नीचे गिर जाते हैं। सत्यवादियों की बस्ती में, झूठे भी मिल जाते हैं। ★★★★★★★★★★ जो श्वानों के दुम के सम हैं, वह कब सीधे होते है। द्वेष कपट को नहीं त्यागते, भले स्वयं ही रोते हैं। ऐसे लोगों का कलुषित मन, कलुष सदा ही गढ़ता है। ज्यों काले कंबल में कोई, रंग कहाँ कब चढ़ता है। अपनों को भी नहीं छोड़ते, दुष्ट सदा छल जाते हैं। सत्यवादियों की बस्ती में, झूठे भी मिल जाते हैं। ★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

बेटी पर कविता

 जन्मदिन गीत - जिज्ञासा बेटी ★★★★★★★★★★★★ रूपलता अरु कोहिनूर की, जीवन की जो आशा है। चन्द्र किरण चितवन चंचल सी, बिटिया यह जिज्ञासा है। ★★★★★★★★★★★ मन को यह सुरभित कर जाती है, जिसकी शुभ किलकारी है। कोहिनूर का जिस गुड़िया में, बसती दुनिया सारी हैं। तुतली-तुतली मीठी-मीठी, जिसकी प्यारी बोली है। सुनकर लगता है बोली में, जैसे मधुरस घोली है। सुकून भरा सुंदर मुखड़ा ज्यों, जीवन की परिभाषा है। चन्द्र किरण चितवन चंचल सी, बिटिया यह जिज्ञासा है। ★★★★★★★★★★★ अपने घर की तू भी शोभा, तू ही राज दुलारी है। अपने मात पिता को बिटिया, तू ही जग की प्यारी है। तेरे हँसने से खिलती है, नित खुशियाँ घर आँगन में। मात पिता का मान बढ़ाना, बिटिया निज तू जीवन में। बिटिया तेरी मुस्कानों में, सत्य सुहावन भाषा है। चन्द्र किरण चितवन चंचल सी, बिटिया यह जिज्ञासा है। ★★★★★★★★★★★★ जन्म दिवस पावन है तेरा, सुख संसार बहाल रहे। स्वस्थ सुखी जीवन हो तेरी, उम्र हजारों साल रहे। ईश्वर से विनती करता हूँ, तुझे सदा ही प्यार मिले। जीत ही जीत रहे जीवन में, नहीं कभी भी हार मिले। बिटिया आगे बढ़ो जगत में, हम सबकी अभिलाषा है, चन्द्र किरण चितवन चंच...

गीत - पुण्य तिरंगे की रक्षा में

  लावणी छंद - पुण्य तिरंगे की रक्षा में ★★★★★★★★★★★★★★ पुण्य तिरंगे की रक्षा में, कुछ भी हम कर जाएंगे। शीश कटा देंगे अपना पर, शीश कभी न झुकाएंगे। ★★★★★★★★★★★ आँख दिखाने वालों सुन लो, बासठ का यह देश नहीं। आडम्बर जिसमे होता हैं, वह अपना संदेश नहीं। बहुत खेल अब खेल चुके हो, केशर वाली घाटी में। सदा सुराख बनाया तुमनें, भारत की परिपाटी में। बदल गया है वक्त हमारा, अब नहीं धोखा खाएंगे। शीश कटा देंगे अपना पर, शीश कभी न झुकाएंगे। ★★★★★★★★★★ समझ गए है हम तो तुम्हारे, अब सारे ही फंदों को। कर प्रयोग आतंक मचाते, गद्दारों जय चंदो को। बंदूक लेकर आ जाते हो, श्वानों जैसे मरने को। हम भी सीमा में बैठे है, प्राण तुम्हारे हरने को। भारत माँ की लाज बचाने, हद से  गुजर भी जाएंगे। शीश कटा देंगे अपना पर, शीश कभी न झुकाएंगे। ★★★★★★★★★ जितने भी भेदी थे घर में, उन सबको है जेल मिला। पहले ही हम बलशाली थे, उस पर अब राफेल मिला। अब भी नहीं सुधरे तो तुमकों, देश के वीर सुधारेंगे। सीमा की क्या बात तुम्हारे, घर में घुसकर मारेंगें। राणा साँगा के वंशज हम, अपना फर्ज निभाएंगे। ...

गीत भीम बाबा

     तांटक छंद - भीम बाबा ★★★★★★★★★★★ दुख दर्दो को झेल जनम भर, निर्धनता के मारे थे। बाबा अपने निज कर्मो से, इस जग में उजियारे थे। ★★★★★★★★★★ छुवाछुत को  मानवता से, जिसनें पूर्ण  मिटाया था। दीन दुखी का बना मसीहा, देवरूप में आया था। जिसने माना एक बराबर, जग में कासी काबा थे। परम् ज्ञान के पुंज शिखर जो, भीमराव निज बाबा थे। जीत लिया जिसने जीवन को, नहीं कभी जो हारे थे। बाबा अपने निज कर्मो से, इस जग में उजियारे थे। ★★★★★★★★★★ नाम पिता का मिला रामजी, माता भीमा बाई थी। और रमा बाई  संगत में, परिणय बँध निभाई थी। बचपन में जन जन से बाबा, सदा सताए जाते थे। फिर भी दुखियों के सेवा में, अपना जनम बिताते थे। सत्य धर्म मानवता जिसने, तन मन में जो धारे थे। बाबा अपने निज कर्मो से, इस जग में उजियारे थे। ★★★★★★★★★★ डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"✍️

गीत - सावन

  ताटंक छंद - सावन ★★★★★★★★ तन मन भीग रहा है मेरा, रिमझिम सरस फुहारों में। कोयल कूक रही है मधुरिम, नाचे मोर बहारों में । ★★★★★★★★★★ घुमड़ घुमड़ कर बादल गरजे, घटा टोप अंधियारी है । आसमान में बिजली चमके, तन मन में डर भारी है । भरे लबालब ताल तलैया, झरने सभी बहकते हैं । तरु लता आलिंगन करके, होकर मगन लहकते हैं । हर प्राणी में सिहरन भर दे , ऐसी कशिश बयारों में । कोयल कूक रही है मधुरिम, नाचे मोर बहारों में । ★★★★★★★★★ मन को मन से लूट रही है, आभा इस हरियाली की । पावस में लक्षण दिखता है, हर घर में खुशहाली का । शिव भक्ति में डूब गया है , भक्तों की सारी टोली । बम बम भोले बम बम भोले, सब ही बोल रहे बोली । इस सावन में भीड़ लगी है , शिव मंदिर की द्वारों में । कोयल कूक रही है मधुरिम, नाचे मोर बहारों में। ★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

गीत - बंद नयन के सजते सपने

  ताटक छंद - बंद नयन के सजते सपने ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ अपना भी जीवन बीता है, खुशियों और बिसादों में। बंद नयन के सजते सपने, झाँक रही है यादों में। ★★★★★★★★ पग-पग जीवन में आगे बढ़, मंजिल हमने पाया है। रूखी सुखी तब रोटी खाकर, जीवन सहज बिताया है। जिसने हमको साथ दिया है, अपनो को नहीं भूलेंगे। अब भी हम कोशिश करते हैं, निज सपनों में झूलेंगें । भरा हौसला हमने हरपल, सुलग रही जज्बातों में। बंद नयन के सजते सपने, झाँक रही है यादों में। ★★★★★★★★★ अब तक जितना भी इस जग में, अपना जीवन बीता है । कभी कदम यह नहीं रुका है, हर राहों को जीता है । अपने तन मन और लगन को, खुद फौलाद बनाया है । कठिन परिश्रम का साधन कर, सुखमय जीवन पाया हैं। कुछ करने की जोश भरें अब, अपने अटल इरादों में। बंद नयन के सजते सपने, झाँक रही हैं यादों में। ★★★★★★★★★ रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर” पीपरभवना,बलौदाबाजार (छ. ग.) मो. 8120587822

गीत - कान्हा

  ताटंक छंद - नंद नयन का तारा है ★★★★★★★★★★★ कोयल कूके जब अमुवा पर,                मन भौंरा इठलाता है। तान बाँसुरी की मधुरिम सी,             कान्हा सरस् बजाता है। श्याम रंग में डूबी श्यामल,                 राधा क्यूँ अकुलाती है। तड़प कभी तो कभी प्रीति की,               विरहन गीत सुनाती है। गोकुल का गइया चरवाहा,               माखन जिसको प्यारा है। मातु यशोदा का ललना है,                  नंद नयन का तारा है। ~~~~~~~★★★★★~~~~ रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

गलवान घाटी

  मुक्तक - गलवान घाटी(चीन की गुस्ताखी) ★★★★★★★★★★★★★★★★ अरे चीनी अरे पाकी, हमें तुम क्यों उकसाते हो। सिंह सोये हुए है जो, उन्हें क्योंकर जगाते हो। स्वान की मौत मरते हो, हिन्द की सीमा में आकर। समझ आता नही तुमको, सदा ही हार जाते हो। ★★★★★★★★ तेरे बंदूक में है जितना, जोर अपने भी लाठी में। बनाता शेर बेटों को, ऊर्वर हिन्द माटी में। अगर चाहें तुझे रे चाइना, पल में मसल देंगे। चटाई धूल वीरों ने, तुझे गलवान घाटी में। ★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822           

माँ पर मुक्तक

  मुक्तक - माँ ★★★★★★★★ लुटाती प्यार का सागर, रखे मुझमें ही अपनी जां। कभी कुछ बात जब कहती, सहज रहती है मेरी हाँ सदा से मैं ही हूँ जिसका, कलेजे का कोई टुकड़ा। नहीं भूली कभी मुझ पर, जताना प्यार मेरी माँ। ★★★★★★★★★ रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर" पिपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

मुक्तक - विदाई

 मुक्तक - विदाई  ★★★★★★★★★ कर्म क्षेत्र में जो सुख-दुख है, मिलजुल कर वह सहन करो।  लाभ जगत को हो शिक्षा से,  मन मंथन तुम गहन करो । जग के जंजालों में पड़कर , आलसवान नहीं बनना । जो दायित्व मिला कंधों को , उसका नित निर्वहन करो । ★★★★★★★★★★ शिक्षा के पावन मंदिर का , सौंप रहा हूँ भार तुम्हें । विनती करता हूँ प्रभुवर से , नहीं मिले कभी हार तुम्हें । मेरे नौकरी कार्यकाल में , जिन लोगों ने साथ दिया । अपने मन की गहराई से , करता हूँ आभार तुम्हें । ★★★★★★★★★★ रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे

मुक्तक जोगी जी

  मुक्तक - जोगी जी ★★★★★★★★★ सरल वह राज नेता था, प्रखर चमका सितारा था। सभी से प्रेम करता था, तभी जन-जन को प्यारा था। दिलाया नाम छत्तीसगढ़ को, जिसनें कर-कर के संघर्ष। मुख्यमंत्री प्रथम जो है, वही जोगी हमारा था। ★★★★★★★★ सभी के दर्द को जिसनें, सदा मन से ही ताड़ा था। किसी की देखता गलती, जोर दे के लताड़ा था। मसीहा बन गरीबों का, सदा जोगी कहाया जो। कभी मंचों पर गर जा था, कभी तनकर दहाड़ा था। ★★★★★★★★★ रचनाकार:-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पिपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

मुक्तक - तिरंगा

           मुक्तक - तिरंगा ★★★★★★★★★★★★ हिमशिखरों से बहकर निकली, पतित पावनी गंगा हैं। नील गगन में करलव करते, दल में उड़े विहंगा हैं। जो भारत की परिपाटी को, धारण करके उड़ता हैं। सबके दिलों में ओज जगाता, अपना पुण्य तिरंगा हैं। ★★★★★★★★★★★ रघुवर रहबर की धरती में, पावन प्रेम बहाता हैं। देख जिसे उत्साह हृदय में, हम सबके भर जाता है। जयकारों के शुभ गुंजन से, मन रोमांचित होता हैं। पुण्य तिरंगा जब जब नभ में, लहर लहर लहराता है। ★★★★★★★★★★★ जिसमे गंध समाहित नित हैं, केशर वाली घाटी की। गाथाएँ जिसमे मिलती है, पुज्य सभी परिपाटी की। जिस पर गर्व सदा होता है, हम सब भारतवासी को। पुण्य तिरंगा शान है अपनी, इस भारत की माटी की। ★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

मुक्तक - दो पन्ने अखबार के

  मुक्तक -दो पन्ने अखबार के ★★★★★★★★★★ कभी सच्चाई बताती है , कभी ये बुराई बताती है । कभी मन में विचलित होता है, तो कभी खुशी दे जाता है। है दो पन्ने की ये अखबार , जिसे मैं हर रोज पढ़ता हूँ। वही तो है खबर देश की, हम सबको जगाते है। ★★★★★★★★★ सुबह दर्शन कराती है, शुभ संदेश लाती है । कभी लूटपाट खबरें तो, कभी हलचल मचाती है । जिसके लेखन से हुआ मैं धन्य , सच्चे पत्रकार है यारों। वही तो असली लेखक हैं, जो हम सबको भाते हैं। ★★★★★★★★★★ रचनाकार–डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर” पिपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

मुक्तक - भाई

  मुक्तक - भाई ★★★★★★★★★ मैं उस पर नाज करता हूँ, वो मुझ पर नाज करता है । गर्व जिसमें हमें होता, वही सब काज करता है। नहीं बचता कोई जिसके सरल, मनभाव से यारों, मेरा प्यारा अनुज है जो, दिलों पर राज करता है। ★★★★★★★ मेरा हर बात सुनता है, मेरा हर बात माना है। जो कहना चाहता हूँ मैं, उसे पहले ही जाना है। सभी का प्यार पाता है, हृदय में सादगी भरकर। मर मिटता है यारों पर, वही प्यारा दीवाना है। ~~~~~~~~~~~~~ रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर" पिपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

मुक्तक दीदी

  मुक्तक - नेह की डोर ★★★★★★★★ नेह की डोर है पावन, सहज ही मैं बँध जाता हूँ। मिला नित ही तुम्हारा स्नेह, मन ही मन हर्षाता हूँ। तुम्ही से प्रेरणा पाकर, हुई सुरभित मेरी आभा। मैं कोहिनूर हूँ  दीदी, तुम्हारा ही मैं भ्राता हूँ। ★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

मुक्तक - जिज्ञासा बेटी

  मुक्तक - जिज्ञासा बेटी ★★★★★★★★★ कभी धरती में लोटी है , कभी बिस्तर में है सोती । कभी मुस्कान भरती है , कभी है रूठकर रोती । कलेजे का मेरा टुकड़ा, यही है दोस्तों सुन लो । है जिज्ञासा मेरे घर बार की, अनमोल एक मोती। ★★★★★★★★★ रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर" पिपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

मुक्तक - मेरी हमसफ़र

  मुक्तक - मेरी हमसफ़र ★★★★★★★★★★ सभी गम दूर है मुझसे , सुखों का ताज मेरा है । जिसे पाकर हुआ मैं धन्य, सुरक्षित आज मेरा है । है मेरी प्राण प्यारी , जान जिस पर मैं छिड़कता हूँ । वही है हमसफर मेरी , वही हमराज मेरा है । मेरे रग-रग में बसती है, मेरी यह प्रेम थाती है । वो मुझसे प्यार करती है , यही हर पल जताती है । मैं जिसके प्यार में बनकर, दीवाना जी रहा यारों। लता है रूप की मेरी , रूपलता कहाती है। ★★★★★★★★★★ रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर" पिपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

योग

  मनहरण घनाक्षरी - योग ★★★★★★★★★★ मनन चिंतन  कर, ईष्ट देव  याद कर। योग ध्यान करके ही, अध्यात्म जगाना है । ★★★★★★★★ एक-एक मिलकर , नित आगे बढ़कर । हरियाली धरा हेतु , वृक्ष को लगाना है। ★★★★★★★ चहुँ ओर योग रहें, न किसी को रोग रहें। सब ही निरोगी रहें, सेहत बनाना है। ★★★★★★★ रोज रोज योग करें, न अधिक भोग करें। जीवन हो सुखधाम, योग अपनाना है। ★★★★★★★ डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

कारगिल वीर

 घनाक्षरी - कारगिल वीर ★★★★★★★★ जब भी पड़ा है वक्त, भारती का बन भक्त। हिन्द के वीरों ने सदा, वीरता दिखाई हैं। ★★★★★★★★ घाव देना चाहा जब, भारत को बैरियों ने। तब-तब बैरियों को, धूल भी चटाई है। ★★★★★★★★ विषम समय जब, कारगिल में बनी तो। साहस पौरुष शौर्य, मन में जगाई है। ★★★★★★★★ भले निज प्राण दिए, तिरंगे को हाथ लिए। टाईगर हील जीत, ध्वज फहराई है। ★★★★★★★★ डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"✍️

घनाक्षरी - कण कण में हो राम

  घनाक्षरी - कण कण में हो राम ★★★★★★★★★★★ कण कण में हो राम, हर क्षण बोलो राम। प्राण में बसे हो राम, राम गुणगाना हैं। ★★★★★★★★ घर घर दीप जले, खुशियाँ अनूप मिले। चलके पावन धाम , राम रम जाना हैं। ★★★★★★★★ आये अब राम राज, धर्मवत रहे काज। प्रभु चरणों में आज, मन को लगाना हैं। ★★★★★★★★ बने राम दरबार, राम जपो बार बार। अयोध्या की नगरी में, जाके तर जाना हैं ~~~~~~~~~~~~~~ रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर” पीपरभावना,बलौदाबाजार (छ.ग.) मो. 8120587822

घनाक्षरी - कोरोना

     *मनहरण घनाक्षरी* ★★★★★★★★★★ कोरोना से वार किया,     चीन ने प्रहार किया,           बैर बार-बार किया,                 सुधर न पाएगा। ★★★★★★★★★★ सीमा पर बढ़ता है,       छूट-पुट लड़ता है,          और गले पड़ता है,                आग लगवायेगा। ★★★★★★★★★★ भु गगन चाहे घाटी,      चंदन यहाँ की माटी,         शहीदी की परिपाटी,               वीरता दिखायेगा। ★★★★★★★★★★★ भूलना संदेश नहीं,     बासठ का देश नहीं,         शेरों वाले भारत से,                कैसे बच पायेग...

घनाक्षरी - बेटियाँ

              बेटियाँ ★★★★★★★★★ कलियाँ को खिलने दो,          पौधे अब उगने दो।             बेटी को इस जग में,                   खुशियाँ दिलाना है। ★★★★★★★★★★★★ दीप जग मगा उठे,       प्रेम उसे लगा बैठे।         कोख के उस बेटी को,                     धरती पे लाना है। ★★★★★★★★★★★★★ रिश्तेदारी निभाती है,        घर को संभालती है।              हर घर की बेटी को,                    मान ही बढ़ाना है। ★★★★★★★★★★★★★ हर...

घनाक्षरी - तिरंगे की शान

  घनाक्षरी - तिरंगे की शान ~~~~~~~~~~~~~                     (1) धूल चटा शत्रुओ को,          कर देते अस्त पस्त।               शत्रु को हरा देना ही,                  सैनिकों का काम है।                     (2) मेरे इन जवानों के,        बढ़े आन बान नित।           करे रक्षा सीमा पर,               नित्य अविराम हैं।                     (3) पीछे नहीं हटते हैं,   ...

आराधना

  कुंडलियाँ - आराधना ★★★★★★★★★ पावन हो आराधना,            मन में उपजे प्रीत। तब गूंजे मनभाव में,           मानवता का गीत । मानवता का गीत,        ह्रदय से हरदम गाओ। बने जगत सुखधाम,       सभी को नित हरषाओ। कह डिजेन्द्र करजोरि,              कर्म भी हो मनभावन। फल की चिंता छोड़,     विनय नित करता पावन।। ★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822      

विधाता की है सत्ता

  विधाता की है सत्ता ~~~~~~~~~~~ सत्ता मेरे गुरुवर की,            इस जग में हैं राज। जहाँ रहे उनकी कृपा,             नहीं बिगड़े जी काज। ना बिगड़े जी काज,         अटल है जिनकी माया। वह ही देते तार,           मनुज की नश्वर काया। कह डिजेन्द्र करजोरि,            कौन खोलेगा पत्ता। रहेगा विद्यमान,           विधाता की है सत्ता। ~~~~~~~~~~~~~~~~ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर” पीपरभवना,बलौदाबाजार (छ.ग.) मो. 8120587822

सावन

  कुंडलियाँ - सावन ★★★★★★★ सावन जब बरसे सरस,             तन मन सब हर्षाय। मोर पपीहा हो मगन,             झूम-झूम इठलाय। झूम-झूम इठलाय,            सुहाना मौसम आया। धरती का यह रूप,         सभी के मन को भाया। कह डिजेन्द्र करजोरि,              बहे पुरवाई पावन । जीवों में है प्रेम,         सदा भरता है सावन।। ★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822          

अब्दुल कलाम

  कुंडलियाँ - अब्दुल कलाम ★★★★★★★★★★ साधक है विज्ञान के,         गढ़कर ज्ञान कलाम। दिया मिसाइल देश को,            तब हैं उनका नाम। तब है उनका नाम,       हिंद को सब कुछ माना। बना देश का मान ,         जगत ने भी है जाना । कह डिजेन्द्र करजोरि,        नहीं है अब कोई बाधक। देश किया मजबूत,         नित्य बनकर साधक।। ★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

बाबा गुरु घासीदास

  कुंडलियाँ -- बाबा गुरु घासीदास सन्देशा गुरुदेव का,                मानव सभी समान। सत्य ज्ञान जो पा सके ,               वह ही है इंसान ।। वह ही है इंसान,              ज्ञान को जिसने जाना । मानव सेवा धर्म,             ज्ञान को सबकुछ माना ।। कह डिजेंद्र करजोरि,             नहीं हो अब अन्देशा। सदा बढ़ाये मान ,               अमर है गुरु सन्देशा।। ~~~~~~~~~~~~~ रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर” पीपरभावना,बलौदाबाजार (छ.ग.) मो . - 8120587822

विघ्नहरण गणराज

         कुंडलियाँ - विघ्नहरण गणराज ★★★★★★★★★★★★ पावन तन मन से करो,          पूजन मिलजुल आज। प्रगट हुए संसार में,           विघ्नहरण गणराज। विघ्नहरण गणराज,           मुस की करे सवारी। जिनके कृपा प्रसाद,        सुखी है सब नर नारी। कह डिजेन्द्र करजोरि,       मूर्त जिनका मनभावन। गणाधीश का आज,       आगमन है शुभपावन।।      ★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822                                             

ज्ञानी पर दोहे

  ज्ञानी पर दोहे ★★★★★★★ ज्ञानी करता ज्ञान से,जग में करम महान। भूल नहीं जाना कभी,ज्ञानी का अवदान।। ज्ञानी गढ़कर ज्ञान को,नित दिखलाता राह। पूरण करता ज्ञान से,इस दुनिया की चाह।। गुरुवर सब ज्ञानी सदा,देकर अनुपम ज्ञान। कुंदन सम निज शिष्य को,करता परम महान।। ज्ञान ध्यान अनुराग की,ज्ञानी करते बात। दुनिया में विज्ञान की,यही परम अनुपात।। ज्ञानी जन की वंदना,अमृत सम कोहिनूर। चरण परम यह छोड़कर,मत रहना तुम दूर।। ★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

रथ यात्रा पर दोहे

               रथ यात्रा ★★★★★★★★★★★★★★                       (१) देव जगनाथ हमारा ,विष्णु है जी महान। रथ यात्रा मना लो, तीर्थ अनोखा धाम।।                     (२) शुद्ध मन से पूजा करें यही हमारा कर्म। देव धाम की रक्षा करें यही हमारा फर्ज।।                      (३) मानव जीवन हमें मिला करो जी सम्मान।  आस्था का यह स्थल शक्ति का है खान ।।                      (४) मन शांत लगे यहां स्नेह प्रेम का भंडार । श्रद्धालुओं की भीड़ यहां पूजे सब संसार।।              ...

पावस पर दोहे

        पावस पर दोहे    ★★★★★★★           !!१!! कोयल मधुरिम गा रही,             दादुर करते शोर। पावस ने सब जीव को,             कर दी भावविभोर।।            !!२!! नदियाँ सब बहने लगी,             करके मधुर निनाद। ताप अगन से जीव के,             मिटी सभी अवसाद।।             !!३!! धरती अब सजने लगी,           हरित चुनर निज धार। पावस ने अनुपम किया,            धरती का शृंगार।।           !!४!! आँखमिचौली कर रहा,     ...

धरा पर दोहे

  धरा पर के दोहे ★★★★★★★★ धाम धरा धन धृत्वरी,धारयिता धनवान। धामक धूमक धाड़ना,धेना धुरपद ध्वान।। धाम धरा कल्याण का,अनुपम अतुलित रूप। जब चाहो तब छाँव हैं, जब चाहो तब धूप।। पुण्य धरा से ही मिलें,रुचिकर अतुल अनाज। कल भी यह सुरभित करें, और सुधारे आज।। धरा भरे भंडार सब,देती सब सुखसार। पुत्र सभी को जानकर,करती है उपकार।। मत करना धूमिल धरा,रखना इसको साफ। वरना दे विपदा कठिन,नहीं करेगी माफ।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर" पिपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

रक्षाबंधन पर दोहे

  रक्षाबंधन पर दोहे ★★★★★★★★ रक्षाबंधन में भरा,भ्रात बहन का प्यार। हो राखी त्यौहार से,सुरभित यह संसार।। दीदी करके आरती,तिलक लगाएं माथ। करके वंदन ईश का,राखी बाँधे हाथ।। रक्षा का देकर वचन , भ्रात करे संकल्प। प्यारी बहना के लिए,शुभकर सभी विकल्प।। भाई बहना में जगे,अनुपम पावन प्यार। ज्यों अनुपम वरदान हो,राखी का त्यौहार।। कोहिनूर ही नित करो,बहना का सम्मान। बहना से ही है सदा,अपने घर की शान।। ★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना (छत्तीसगढ़) मो. 8120587822

बेटी पर दोहे

                       बेटी पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★ बेटी बुलबुल बाग की , बेटी माँ का रूप। बेटी ही सुरभित करे,दो कुल अतुल अनूप।। मात-पिता की लाडली,बेटी घर की शान। बेटी भी घर में बने,क्योंकर नहीं महान।। बेटी ही कविता सरस,और मधुर सुर-ताल। बेटी से सुरभित सदा,घर बगिया की डाल।। बेटी माँ की है परी,बाबुल का अभिमान। बेटी से ही हो परम,सदन में शुभ बिहान।। कोहिनूर सुरभित रहे ,बेटी का मन बाग। इनके खुशियों में कभी,नहीं लगाना आग।। बेटी होती है सदा , अपने घर की मान । जिसके पावन कर्म पर,होता है अभिमान।। घर में खुशियाँ दे सदा,बेटी हैअभिमान। ऐसी बेटी का हमें ,करना निज सम्मान।। बेटी के मन में जगे,धरम करम का आस। बेटी को रखना सदा ,अंतर मन के पास।। किनको प्यारा है नही,तुतले मीठे बोल। बेटी के हर शब्द में,प्रेम भरे अनमोल।। जिज्ञासा के प्रेम में , मिलता है आनंद। कोहिनूर जिसके लिए,लिखताअनुपम छंद।। ★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे कोहिनूर

भाईचारा पर दोहे

  भाईचारा पर दोहे ★★★★★★★★ भाईचारा ही करें , इस जग को आलोक। जन-जन का हरता यही,दुख पीड़ा अरु शोक।। भाईचारा से बने , हर परिवार महान। इसके बल बढ़ने लगे,जन-जन में अवदान।। भाईचारा जो रहे , परिवारों से दूर। अपनों के कारण तभी,अपने बनते क्रूर।। भाईचारा जब रहे , मन मंदिर के साथ। तब पूजन होगी सफल,कृपा करेंगे नाथ।। भाईचारा का मनन,करो जो कोहिनूर । फिर तुमसे संसार यह,कैसे होगा दूर ।। ★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

विविध दोहे

                विविध दोहे             ★★★★★★ (1) उपचार धरती माँ की वंदना,यह ही जग में सार। सबको सम ही जानकर,करती हैं उपचार।। (2) उपकार जो मानव करता नहीं,जीवन मे उपकार। उसको इस संसार में, मिले कहाँ से प्यार।। (3) निर्गुण निराकार निर्गुण परम्, ब्रम्ह तत्व का ज्ञान। इसे हृदय में धारकर, मानव बने महान।। (4) गंतव्य सदा रहा संसार में, मानव का गंतव्य। ज्ञान ध्यान अरु साधना,मान प्रतिष्ठा द्रव्य।। (5) वक्तव्य मिला मुझे भी खूब बल, देने को वक्तव्य। जहाँ बहुत स्रोता मिले, और मंच था भव्य।। (6)करुण करुण भाव मन में लिए,गए द्वारिका धाम। तभी सुदामा के बने,जीवन के हर काम।। (7) वरुण वरुण देव की वंदना,करू सुबह अरु शाम। जिनके कृपा प्रसाद से,बने जगत का काम।। (8) अरुण अरुण उदय जब प्रात में,हो दिनकर के संग। सुरभित हो संसार सब,स्वर्णिम पाकर रंग।। (9) द्रव्य द्रव्य सदा संसार में,अतुलित पावन नीर। इसके बिन सम्भव नहीं, जीवन की तस्वीर।। (10) श्रव्य मधुर वचन के श्र...

चिड़िया पर दोहे

                 चिड़िया पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★★★★★ चिड़िया चहकी है फुदक,जब-जब अमुआ ठाँव। तिनका-तिनका चुन रही,सिर जाने निज ठाँव।। बैठी है निज घोसला ,चूजों का कर ध्यान। ध्यान लगाकर जाँच लो,यह ही प्रेम विधान।। फुदक फुदक कर नाचती,होती बहुत प्रसन्न। दिख जाती है जब कही,इक दो दाना अन्न।। कोमल पंख पसारकर,उड़ती नभ की ओर। दाना पानी के लिए,जब होती शुभ भोर।। चिड़ियों से भी प्यार कर,द्वेष कपट रख दूर। बनने देना घोसला,निज सदन कोहिनूर।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर" पिपरभावना, बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

मेरा देश पर दोहे

  मेरा देश पर पाँच दोहे ★★★★★★★★★★★★★ प्रेम रंग में है रंगा ,अनुपम मेरा देश। दुनिया को देता यही,प्रेम भरा संदेश।। वीरों की पावन धरा , मेरा देश महान। सब करते नित प्रेम से,ईश्वर का गुणगान।। दूर जहाँ रहता सखा,मन से कपट कलेश। प्रेम सदा ही बाँटता , भारत मेरा देश।। ऐसा मेरा देश है , तृप्त करे जो आत्म। ऋषियों मुनियों ने जहाँ,दिया पूण्य अध्यात्म।। सुरभित मेरा देश है,सत्य धरम की रीति। तभी रहे मनभाव में,सहज सरल सब प्रीति।। ★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर" पिपरभावना, बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

हिंदी भाषा पर दोहे

              हिंदी भाषा पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★★ हिंदी बिंदी देश की,और यही पहचान। हिंदी में भी शान है,हिंदी है अभिमान।। हिंदी जो बोले सखा,वह भारत का लाल। परिपाटी रक्षित वही,करता बनकर ढाल।। मुख में हिंदी का रहे,जब पावन परिधान। निज भारत का है वही,गरिमामय पहचान।। दक्षिण की पा सभ्यता,स्वयं लगाकर रोग। निज हिंदी को भूलकर,इठलाते क्यों लोग।। कोहिनूर नित ही करो,हिंदी का सम्मान। इस हिंदी से देश की,जग में बढ़ते मान।। ★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना (छत्तीसगढ़) मो. 8120587822

गाँव पर दोहे

                 गाँव पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★★★★ तन मन को शीतल करें,आम नीम का छाँव। ऐसे  मेरे   देश  के ,  सुरभित  पावन  गाँव।। माटी की सौंधी महक,और खगों के बोल। हरियाली के रंग से,खुशी मिले अनमोल।। नदिया नालों में बहे,कल कल करती धार। ज्यों धरती से कर रहीं,पुण्य प्रीत मनुहार।। परिपाटी सुरभित जहाँ , त्यौहारों के संग। मिले सभी मनबाग में,प्रेम प्रीति का रंग।। कोहिनूर  प्यारा लगे , गाँवों  का  संसार। परिपाटी सुरभित जहाँ,और बड़े नित प्यार।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

योग पर दोहे

                 योग पर दोहे              ★★★★★★ योग क्रिया तन को करें,अतुल परम बलवान। इसके पुण्य प्रभाव से,मिटते छल अभिमान।। चरक पतंजलि ने दिया,हमको अनुपम योग। दूर करें तन से सदा,सरल सहज सब रोग।। पावन तन मन आत्म हो,जनम बने सुखधाम। योग क्रिया करना प्रथम,तब करना कुछ काम।। नाश करें सब रोग का,और बड़े मुख ओज। व्रत संयम मन धारकर,योग करें सब रोज।। ध्यान लगाकर जो करें , पावन प्राणायाम। आसन जप तप साधना,और जपो प्रभु नाम।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

गुरु पर दोहे

                 गुरु पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★★★ मिले ज्ञान कब गुरु बिना?गुरुवर सदा महान। इनके ही आशीष से,मिलता है अवदान।। गुरु ज्ञान ही है सुधा,बाकी सब विषबेल। इनके परम् प्रताप से,हो ईश्वर से मेल।। शिष्य सदा जब धार ले,ज्ञान पुंज की तेज। दुख विपदा होता स्वयं,सरल सहज निस्तेज।। ★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822

कोहिनूर के दोहे

 कोहिनूर की दोहे ★★★★★★★★ पूरी - पूरी  ढाँक  ली , मेघों  ने आकाश । पावस में दिखता नही,अब तो सूर्य प्रकाश।। देख छटा संसार की , मन है भाव विभोर। मतवाली कोयल करें,अनुपम मधुरिम शोर।। जब मन है कामना,तब बनते है काम। मन के पावन प्रेम से,सदा मिले है राम।। ★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"

कोहिनूर के दोहे

              कोहिनूर की दोहे ★★★★★★★★★★★★★★★ आँख मिचौली खेल में , दक्ष हुई बरसात। कहीं विकट जलधार है,कहीं उष्ण आघात।। मन वीणा के तार में , कहाँ बची झनकार। भटक गए निज राह से,अब सब रचनाकार।। मतलब मन में साधकर , आते हैं आगत्य। शायद अब मृत प्राय है,इस दुनिया में सत्य।। बागडोर जिनको दिया,समझ परम करतार। निज भारत के शील को,करते तारम तार।। कोहिनूर जग में मिले,जन जन के मन खोट। निज मन नित्य सँवारना,मत करना मन छोट।। ★★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

संस्कार पर दोहे

          संस्कार पर दोहे        ★★★★★★★         ज्ञानी करता ज्ञान से,जग में करम महान। मत भूलना संस्कार को,ज्ञानी का अवदान।। सरल सहज व्यवहार है,जीवन का आधार। श्रेष्ठ वही मानव यहाँ,जिसमें शुभ संस्कार।। प्रीत रीत की बात हो , सुरभित हो संसार। संभव यह तब ही सखा,जब धारो संस्कार।।  शांत सरोवर में सदा , खिलते सुख के फूल। क्रोध जलन से कब बना,जीवन यह अनुकूल।। मानवता के भाव का,समझ गया जो मर्म। उनके पावन कर्म  से , रहता  दूर  अधर्म।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"

मानवता पर दोहे

              जीवन की सच्चाई पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★★★★ मानवता को त्याग कर,चुना कलुषमय  कर्म। दुख  पाने  के  बाद भी , करता रहा अधर्म।। जीवन भर पीटे मनुज,आडम्बर का ढोल। लेकिन प्रभु के द्वार में,खुल जाते है पोल।। मतलब में पड़कर मनुज,भूल गया परमार्थ। अपनों से भी कर रहा,लोभवशी हो स्वार्थ।। सत्य धरम का है सखा,बहुत कठिनतम राह। किंतु मिले इस राह में,मन को खुशी अथाह।। कोहिनूर  भागों  नहीं , कर्तव्यों  से  दूर। पाने अपने लक्ष्य को,कर्म करो भरपूर।। ★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"

ज्योति पर दोहे

  ज्योति पर दोहे ★★★★★★★ सत्य ज्योति जलती रहें,जन-जन के मनभाव। द्वेष कपट सब क्यो करें,मानव मन में घाव।। ज्योति पुंज जब हो सजग,बनकर तम का काल। सब दुनिया में क्यो रहें , द्वेष कपट जंजाल।। ज्योति सदा जगमग जले,माता के निज धाम। शक्ति की जब हो कृपा,बन जाते सब काम।। ★★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"

वीर जवान पर दोहे

  वीर जवान पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★★★★ भारत माँ के मान में , अपने  वीर  जवान। सीमा पर रहकर सजग,नित्य बढ़ाते शान।। रक्षण करने देश का , सैनिक हैं विख्यात। प्राण लगाते है सदा , रक्षा  में  दिन  रात।। जिनके बल सुरभित सभी,नित ही आठोयाम। ऐसे वीर सपूत  को , शत-शत  करूँ  प्रणाम।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

दोहा संग्रह

 दोहा संग्रह 1.पवन* पावन मन उपवन बने,धरा बनाये स्वच्छ। पर्यावरण सुधार कर, सुख पनपे प्रत्यक्ष।। *2. हिरण* व्यग्र हिरन को देखकर,लालच करते शेर। झपट पड़ा पुरजोर से,हुई हिरन सब ढेर।। *3. मोह* ध्यान सदा रखकर चलो,राह में कोहिनूर। मोह जाल में मत पड़ो,रह जाओगे दूर।। *4. लक्ष्य* लक्ष्य शिखर पर हो सदा,ऊँची भरें उड़ान। तभी मिले जग में तुझे,मानव निज पहचान।। *5. तीर* जब उड़ान भरता मनुज,मन में धर के धीर। लक्ष्य स्वतः आकर मिले,ज्यों निशान पर तीर।। 🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻 रचनाकार:-डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"

नारी पर दोहे

 नारी पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★★ माँ बेटी पत्नी बहन,पुज्य सभी है रूप। नारी से संसार को,ममता मिले अनूप।। जो  नारी  नर  को  जने , प्रीति  जगा  संसार। उस पर ही करता मनुज,नित नित अत्याचार।। नारी  के  सम्मान  में , पीट  रहे  जो  ढोल। जो दिखता वह है नहीं,खुल ही जाता पोल।। जग में कब का हो चुका,मानवता का अंत। कामी भी  जग लूटने , बन  जाते  है  संत।। रोज  अधर्मी हर  रहे , शील सुता  का  शील। धिक धिक इस कानून पर,देता इनको ढील।। जिनको होना चाहिए,जीवन भर का जेल। वह समझे कानून को,निज हाथों का खेल।। संविधान में जो लिखा,कानून का विधान। भूल गए अब तो मनुज, बाबा का अवदान।। नारी के सम्मान में,हृदय जलाकर दीप। बेटी की रक्षा करो,ज्यों मोती को सीप।। कोहिनूर जग से करे,विनती बारम्बार। बेटी के सहयोग में,रहना नित तैयार।। ★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"

हनुमान पर दोहे

            हनुमान पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★★★ मंगलमय भगवान की,पाकर कृपा अनन्य। मुक्ति पा संताप से ,बने जनम यह धन्य।। सांझ सबेरे जो करे,रघुवर का गुणगान। परम दयालु है प्रभु,राम भक्त हनुमान।। दिनकर को भी ग्रास ली,समझा फल आहार। हनुमत भक्तों पर करें,निसदिन कृपा अपार।। राम भक्त के नाम से,है जिनकी पहचान। अतुलित बलशाली प्रभु,महावीर हनुमान।। कोहिनूर नित ही करें,जिनका शुभ गुणगान। मंगल ही करते सदा ,मंगलमय हनुमान।। ★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

कान्हा पर दोहे

                 कान्हा पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★★★ कान्हा के शुचि प्रेम का,मन में भर विश्वास। संग रचाने को चली,गोपिन वन में रास।।१।। कान्हा के शुभ बोल में,प्रेम मधुर रस राग। कालिंदी में कूदकर,संहारा विषनाग।।२।। मधुवन को गुंजित रहे,बाँसुरिया की तान। कान्हा के बन गोपियाँ,गाती मंगलगान।।३।। कान्हा ने लीला रची,धर मानव का रुप। धन्य हुए जग के सभी,जीव जंतु सूर भूप।।४।। कोहिनूर मन से जपो,कान्हा का नित नाम। भक्तिमयी जीवन करो,धन्य करो निज धाम।।५।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

नाग पर दोहे

                नाग पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★★★ पूजन तन मन से करो,नागदेव का आज।  निष्ठा में मत हो कमी,सभी बनेगें काज ।। जग के कण कण में बसे,नागदेव का नाम।  धन्य करे जीवन सखा,अर्पण कर निस काम।। सावन का महीना है,नाग पंचमी त्यौहार।  भोले जी की हो कृपा,सब का हो उद्धार।। जब देखोगे दूर से,सुख ही मिले अतीव। बिन छेड़े डसता नहीं,नाग जगत का जीव।। नागो से बढ़कर हुए,अब मानव विषदंत। आती है जिन पर दया,सखा मुझे अत्यंत।। ★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"

पिता पर दोहे

                  पिता पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★★★ पिता सदा परिवार का , होता पालनहार। पुज्य पिता से है सुरभ,अपना घर परिवार।। पुज्य पिता संसार में,है भगवन का रूप। इसके पावन प्रेम से,खुशियाँ मिले अनूप।। मन में रखता है सदा,पिता परम निज प्यार। निज बच्चों का है यही,खुशियों का संसार।। धर्म निभाता है पिता,रहकर घर में शांत। जैसे हो संसार का ,सागर परम प्रशांत।। कर्म सभी करने पिता,नहीं डिगाता पाँव। बच्चों को देता सदा,प्रेम समाहित छाँव।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"

सहयोग पर दोहे

          सहयोग पर दोहे         ★★★★★★★★ तन मन को संवारता,अनुपम पावन योग। जीवन जीने के लिए, करता है सहयोग।। मानव के सहयोग को,आतुर नित भगवान। जिसके मन में हो सदा,पूजन परम विधान।। वाणी में संयम रहे,पोषित पावन भोग। तब ही करते है सखा,जीवन में सहयोग।। मानव बिन सहयोग के,करता नित्य अनर्थ। लड़ पड़ता है दौड़कर,संचय करने अर्थ।। कोहिनूर ही नित करो,तन मन से सहयोग। तभी जगत से मिट सके,द्वेष कपट का रोग।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

श्री राम पर दोहे

                  श्रीराम पर दोहे           ★★★★★★★★★★ जिनके पावन जाप से,बन जाते सब काम। जग में सुख के धाम हैं,रघुवंशी श्रीराम।। वनवासी बनकर रहें , वन में चौदह वर्ष। पिता वचन पालन किया,कर अतुलित संघर्ष।। राम कृपा जिस पर रहें,सुखी वही संसार। सरल सहज उसका लगे,भव से बेड़ापार।। राम राज इक बार फिर,जग करने उजियार। आने वाले है सखा , जग के पालनहार।। बनने वाली है सखा,रघुवर का अब धाम। तब बोलो विश्वास से,जय जय जय श्रीराम।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

श्री गणेश पर दोहे

  श्री गणेश पर दोहे ★★★★★★★★★★★★★★★★ श्री गणेश की पा कृपा,कर लो जय जयकार। बल बुद्धि अरु ज्ञान का, सपन तभी साकार।। गणनायक गणराज की,महिमा अतुल अनूप। जिनको नित ही पूजते,सब मुनि जन सुर भूप।। वाहन जिनका मूस है,मोदक जिनका भोग। लम्ब उदर गज शीश है,अनुपम है संयोग।। पावन भादो मास में , आते है गणराज। विघ्न हरें संसार के,पूर्ण करें सब काज।। श्री गणेश शंकर सुवन,माँ गौरी के पुत्र। बल बुद्धि विज्ञान है,जिनके पावन सूत्र।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822