घनाक्षरी - कण कण में हो राम
घनाक्षरी - कण कण में हो राम
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कण कण में हो राम,
हर क्षण बोलो राम।
प्राण में बसे हो राम,
राम गुणगाना हैं।
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घर घर दीप जले,
खुशियाँ अनूप मिले।
चलके पावन धाम ,
राम रम जाना हैं।
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आये अब राम राज,
धर्मवत रहे काज।
प्रभु चरणों में आज,
मन को लगाना हैं।
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बने राम दरबार,
राम जपो बार बार।
अयोध्या की नगरी में,
जाके तर जाना हैं
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रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभावना,बलौदाबाजार (छ.ग.)
मो. 8120587822
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