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कलम उठाकर हमने जाना

  कलम उठाकर हमने जाना ================= तमस आज छाई है जग में, विपदा गहराई है जग में। नहीं सत्य का कहीं ठिकाना, कलम उठाकर हमने जाना। जिनके हाथों बागडोर है, वही देश को लूट रहे है। और उन्हीं के गुंडे हमको, समय-समय पर कूट रहे है। फिर भी हम सब उन दुष्टों का, नित गाते सम्मान तराना। नहीं सत्य का कहीं ठिकाना, कलम उठाकर हमने जाना। जो जितना बदनाम हुआ है, उसका उतना नाम हुआ है। इसीलिए तो पहन मुखौटा, हर रावण अब राम हुआ है। आज सभी मतलब के साथी, मर्यादा का गया जमाना। नहीं सत्य का कहीं ठिकाना, कलम उठाकर हमने जाना। नहीं बचे हैं आज हितैषी, जिसकी लाठी उसकी भैंसी। भ्रष्टाचारी घर-घर में है, नियमों की ऐसी की तैसी। भले रंक हो या राजा हो, काम नहीं हो बिन नजराना। नहीं सत्य का कहीं ठिकाना, कलम उठाकर हमने जाना। धन बल पद के सब लोभी, इसी बात की होड़ मची है। अब लोगों के उर अंतस में, धैर्य कामना कहाँ बची है। देने की तो बात नहीं है, सभी चाहते हैं बस पाना। नहीं सत्य का कहीं ठिकाना, कलम उठाकर हमने जाना। राग द्वेष जग ले डूबेगा, यही सभी को समझाता है। राम राज आ जाये फिर से, कोहिनूर नित ही गाता है। करम धरम के पथ में यार...