सहयोग पर दोहे

 

        सहयोग पर दोहे
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तन मन को संवारता,अनुपम पावन योग।
जीवन जीने के लिए, करता है सहयोग।।

मानव के सहयोग को,आतुर नित भगवान।
जिसके मन में हो सदा,पूजन परम विधान।।

वाणी में संयम रहे,पोषित पावन भोग।
तब ही करते है सखा,जीवन में सहयोग।।

मानव बिन सहयोग के,करता नित्य अनर्थ।
लड़ पड़ता है दौड़कर,संचय करने अर्थ।।

कोहिनूर ही नित करो,तन मन से सहयोग।
तभी जगत से मिट सके,द्वेष कपट का रोग।।
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रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822 

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