पावस पर दोहे
पावस पर दोहे
★★★★★★★
!!१!!
कोयल मधुरिम गा रही,
दादुर करते शोर।
पावस ने सब जीव को,
कर दी भावविभोर।।
!!२!!
नदियाँ सब बहने लगी,
करके मधुर निनाद।
ताप अगन से जीव के,
मिटी सभी अवसाद।।
!!३!!
धरती अब सजने लगी,
हरित चुनर निज धार।
पावस ने अनुपम किया,
धरती का शृंगार।।
!!४!!
आँखमिचौली कर रहा,
पावस में रवि आज।
सब जीवों का बढ़ गया,
स्वयं सभी सब काज।।
!!५!!
पावस में अनुपम लगे,
रिमझिम गिरती बूँद।
भीगना चाहे मन सहज,
अब तो अँखियाँ मूँद।।
★★★★★★★★★★★★
रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822
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