ज्ञानी पर दोहे
ज्ञानी पर दोहे
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ज्ञानी करता ज्ञान से,जग में करम महान।
भूल नहीं जाना कभी,ज्ञानी का अवदान।।
ज्ञानी गढ़कर ज्ञान को,नित दिखलाता राह।
पूरण करता ज्ञान से,इस दुनिया की चाह।।
गुरुवर सब ज्ञानी सदा,देकर अनुपम ज्ञान।
कुंदन सम निज शिष्य को,करता परम महान।।
ज्ञान ध्यान अनुराग की,ज्ञानी करते बात।
दुनिया में विज्ञान की,यही परम अनुपात।।
ज्ञानी जन की वंदना,अमृत सम कोहिनूर।
चरण परम यह छोड़कर,मत रहना तुम दूर।।
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रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822
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