ज्योति पर दोहे
ज्योति पर दोहे
★★★★★★★
सत्य ज्योति जलती रहें,जन-जन के मनभाव।
द्वेष कपट सब क्यो करें,मानव मन में घाव।।
ज्योति पुंज जब हो सजग,बनकर तम का काल।
सब दुनिया में क्यो रहें , द्वेष कपट जंजाल।।
ज्योति सदा जगमग जले,माता के निज धाम।
शक्ति की जब हो कृपा,बन जाते सब काम।।
★★★★★★★★★★★★★★★★★
रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"
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