कारगिल वीर

 घनाक्षरी - कारगिल वीर

★★★★★★★★

जब भी पड़ा है वक्त,

भारती का बन भक्त।

हिन्द के वीरों ने सदा,

वीरता दिखाई हैं।

★★★★★★★★

घाव देना चाहा जब,

भारत को बैरियों ने।

तब-तब बैरियों को,

धूल भी चटाई है।

★★★★★★★★

विषम समय जब,

कारगिल में बनी तो।

साहस पौरुष शौर्य,

मन में जगाई है।

★★★★★★★★

भले निज प्राण दिए,

तिरंगे को हाथ लिए।

टाईगर हील जीत,

ध्वज फहराई है।

★★★★★★★★

डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"✍️





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