कान्हा पर दोहे
कान्हा पर दोहे
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कान्हा के शुचि प्रेम का,मन में भर विश्वास।
संग रचाने को चली,गोपिन वन में रास।।१।।
कान्हा के शुभ बोल में,प्रेम मधुर रस राग।
कालिंदी में कूदकर,संहारा विषनाग।।२।।
मधुवन को गुंजित रहे,बाँसुरिया की तान।
कान्हा के बन गोपियाँ,गाती मंगलगान।।३।।
कान्हा ने लीला रची,धर मानव का रुप।
धन्य हुए जग के सभी,जीव जंतु सूर भूप।।४।।
कोहिनूर मन से जपो,कान्हा का नित नाम।
भक्तिमयी जीवन करो,धन्य करो निज धाम।।५।।
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रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822
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