जय कन्हैया लाल की
जय कन्हैया लाल की
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कान्हा के बंशी के धुन में ,
गोपियाँ की मन भा गई।
लीलाएँ करने को कान्हा,
सब के दिल में छा गई।
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बाल सखा के संग रहकर,
माखन खूब वह खाये है ।
गोकुल नगरी धाम में कान्हा,
सभी गोपियों को नचाये है।
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माखन चोरी करता कान्हा ,
गोपियाँ तंग हो जाती थी।
माता यशोदा ने उनको तो,
कान जोर खिंच लाती थी ।
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नंद के दुलारे कान्हा,
पावन जिसकी पालकी,
प्रेम से मिलकर बोलो,
जय कन्हैया लाल की।
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रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822
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