विधाता की है सत्ता

 

विधाता की है सत्ता
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सत्ता मेरे गुरुवर की,
           इस जग में हैं राज।
जहाँ रहे उनकी कृपा,
            नहीं बिगड़े जी काज।
ना बिगड़े जी काज,
        अटल है जिनकी माया।
वह ही देते तार,
          मनुज की नश्वर काया।
कह डिजेन्द्र करजोरि,
           कौन खोलेगा पत्ता।
रहेगा विद्यमान,
          विधाता की है सत्ता।
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रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे “कोहिनूर”
पीपरभवना,बलौदाबाजार (छ.ग.)
मो. 8120587822

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