गाँव पर दोहे
गाँव पर दोहे
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तन मन को शीतल करें,आम नीम का छाँव।
ऐसे मेरे देश के , सुरभित पावन गाँव।।
माटी की सौंधी महक,और खगों के बोल।
हरियाली के रंग से,खुशी मिले अनमोल।।
नदिया नालों में बहे,कल कल करती धार।
ज्यों धरती से कर रहीं,पुण्य प्रीत मनुहार।।
परिपाटी सुरभित जहाँ , त्यौहारों के संग।
मिले सभी मनबाग में,प्रेम प्रीति का रंग।।
कोहिनूर प्यारा लगे , गाँवों का संसार।
परिपाटी सुरभित जहाँ,और बड़े नित प्यार।।
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रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822
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