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कोहिनूर की आभा

कोहिनूर की आभा ★★★★★★★★ पूरी - पूरी  ढाँक  ली , मेघों  ने आकाश । पावस में दिखता नही,अब तो सूर्य प्रकाश।। देख छटा संसार की , मन है भाव विभोर। मतवाली कोयल करें,अनुपम मधुरिम शोर।। जब मन है कामना,तब बनते है काम। मन के पावन प्रेम से,सदा मिले है राम।। ★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822  

सैनिकों पर दोहे

भारत माँ के मान में,अपने वीर जवान। सीमा पर रहकर सजग,नित्य बढ़ाते शान।। रक्षण करने देश का,सैनिक हैं विख्यात। प्राण लगाते है सदा,रक्षा में दिन रात।। जिनके बल सुरभित सभी,नित ही आठोयाम।। ऐसे वीर सपूत को , शत-शत करूँ प्रणाम।। ★★★★★★★★★★★★★★★★ रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.) मो. 8120587822