संस्कार पर दोहे
संस्कार पर दोहे
★★★★★★★
ज्ञानी करता ज्ञान से,जग में करम महान।
मत भूलना संस्कार को,ज्ञानी का अवदान।।
सरल सहज व्यवहार है,जीवन का आधार।
श्रेष्ठ वही मानव यहाँ,जिसमें शुभ संस्कार।।
प्रीत रीत की बात हो , सुरभित हो संसार।
संभव यह तब ही सखा,जब धारो संस्कार।।
शांत सरोवर में सदा , खिलते सुख के फूल।
क्रोध जलन से कब बना,जीवन यह अनुकूल।।
मानवता के भाव का,समझ गया जो मर्म।
उनके पावन कर्म से , रहता दूर अधर्म।।
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रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"
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