नाग पर दोहे

                नाग पर दोहे

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पूजन तन मन से करो,नागदेव का आज। 

निष्ठा में मत हो कमी,सभी बनेगें काज ।।


जग के कण कण में बसे,नागदेव का नाम। 

धन्य करे जीवन सखा,अर्पण कर निस काम।।


सावन का महीना है,नाग पंचमी त्यौहार। 

भोले जी की हो कृपा,सब का हो उद्धार।।


जब देखोगे दूर से,सुख ही मिले अतीव।

बिन छेड़े डसता नहीं,नाग जगत का जीव।।


नागो से बढ़कर हुए,अब मानव विषदंत।

आती है जिन पर दया,सखा मुझे अत्यंत।।

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रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"



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