अषाण के दिन
अषाण के दिन ================== पहली नांगर बईला ल लेके, खेत कोती चल देवन अषाण के दिन म। फेर कहाँ लुकागे ये दिन ह।। 2।। चटनी बासी अउ गोंदली ल धरके, आवय हमर गोसानिन। तीर म बइठके गोठियाय त, कतको पीरा हो जाय उछीन। फेर बेरा के होत ल अर तता कहन, चिरई चुरगुन के चाँव चाँव। फेर कहाँ लुकागे ये दिन ह।। 2।। भुईया के भगवान ह थकगे, नांगर के जगा टेक्टर ह लगगे। कहाँ बियासी,कहाँ कोपर, ठलहा बनके सब होगे लोफर। तरिया नरवा के गरी खेलोवईया, मोर गाँव के मछरी धरोइया। फेर कहाँ लुकागे ये दिन ह।। 2।। ==================== डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" ✍️✍️