भाईचारा पर दोहे

 

भाईचारा पर दोहे
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भाईचारा ही करें , इस जग को आलोक।
जन-जन का हरता यही,दुख पीड़ा अरु शोक।।

भाईचारा से बने , हर परिवार महान।
इसके बल बढ़ने लगे,जन-जन में अवदान।।

भाईचारा जो रहे , परिवारों से दूर।
अपनों के कारण तभी,अपने बनते क्रूर।।

भाईचारा जब रहे , मन मंदिर के साथ।
तब पूजन होगी सफल,कृपा करेंगे नाथ।।

भाईचारा का मनन,करो जो कोहिनूर ।
फिर तुमसे संसार यह,कैसे होगा दूर ।।
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रचनाकार- डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822

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