अषाण के दिन

       अषाण के दिन 

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पहली नांगर बईला ल लेके,

खेत कोती चल देवन  अषाण के दिन म।

फेर कहाँ लुकागे ये दिन ह।। 2।।

चटनी बासी  अउ गोंदली ल धरके,

आवय हमर गोसानिन।

तीर म बइठके गोठियाय त,

कतको पीरा हो जाय उछीन।

फेर बेरा के होत ल अर तता कहन,

चिरई चुरगुन के चाँव चाँव।

फेर कहाँ लुकागे ये दिन ह।। 2।।

भुईया के भगवान ह थकगे,

नांगर के जगा टेक्टर ह लगगे।

कहाँ बियासी,कहाँ कोपर,

ठलहा बनके सब होगे लोफर।

तरिया नरवा के गरी खेलोवईया,

मोर गाँव के मछरी धरोइया।

फेर कहाँ लुकागे ये दिन ह।। 2।।

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डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" ✍️✍️






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