विवेकानंद
स्वामी विवेकानंद जी
==============
जिनके मन में शुभताओं के,होते है मकरंद।
वही जगत में बन पाते है ,संत विवेकानंद।।
नहीं उपजता है जब मन में,लोभ कपट अनुराग।
सांसारिक हर सुख का करते जो,उर अंतस से त्याग।
धर्म ध्वजा लेकर चलते है,करने जग उत्थान।
उनके शुभ कर्मो से होता,जग में सुखद बिहान।
कभी नहीं छू सकता जिनको,कलुष कुटिलता फंद।
वही जगत में बन पाते है ,संत विवेकानंद।।
सत्य सनातन त्याग आज हम,चून पीड़ा के शूल।
उस कर तार जगत पालक को,आज गए है भूल।
अपने पग में कुल्हाड़ी से,करते है नित वार।
फिर कैसे न मिले जगत में,मानवता को हार।
निष्ठा धैर्य हृदय में धारे,नहीं बने मतिमंद।
वही जगत में बन पाते है ,संत विवेकानंद।।
★★★★★★★★★★★★★★★★★
डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" ✍️✍️
Comments
Post a Comment