वीर नारायण
बलिदानी वीर नारायण सिंह ==========================
चिन्हारी जे वीर पुरुष हे,भरे कटोरा धान के।
वीर नारायण ले पबरित हे, भुइँया सोनाखान के।
वीर नारायण के जिनगी म,अइसे दिन भी बीते हे।
एक अकेला अंग्रेजी शासन से,लड़ के जीते हे।
जब अकाल के बेरा आईस,जन-जन तरसीन दाना ल।
धरम करम बर ये ही धरमी,लुटे रहिस खजाना ल।
घोड़ा म चढ़के जाएँ, बलिदानी सीना तान के।
वीर नारायण ले पबरित हे, भुइँया सोनाखान के।
बज्र बरोबर तन के बलिदानी,जब भुइँया नापे।
सेट महाजन अउ अँग्रेजी,शासन थर-थर काँपे।
जेहर आघु म आ जाये,अपन प्राण गवाएं।
मेंछा म दे ताव वीर जब,जब तलवार चलाये।
आज वहीं बलिदानी दे,आदर्श हमर अभिमान के।
वीर नारायण ले पबरित हे, भुइँया सोनाखान के।
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डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" ✍️✍️
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