ज्ञान सुधा भाग 2

      अनुपम भारत

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बरस रहे है शरद सुहावन,

मौसम भी है अति मनभावन।

करता है मन को उजियारा,

अनुपम भारत वर्ष हमारा।


नदिया पर्वत जंगल घाटी,

चंदन जैसे पावन माटी।

व्यवहारों में नेक रहेंगे,

भारतवासी एक रहेंगे।


श्रद्धा से झुकती माथाएँ,

सुनकर वीरों की गाथाएँ।

पहन चले थे वीर सवांगा,

वीर शिवाजी राणा सांगा।


अंग्रेजों से कब हारे थे,

वीर पुरुष जो ध्रुव तारे थे।

आजादी की बनकर आँधी,

चलते थे लकुटी ले गाँधी।

★★★★★★★★★★

डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"


     

     रेल चली भाई चली

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हर मौसम में प्रेम भाव से,

करने सबसे प्रेम चली।

रेल चली भाई रेल चली,

छुक छुक करती रेल चली।


अपने डिब्बों के संग चलकर,

नभ में धुँआ उड़ाती है।

हमको लक्ष्य शिखर पहुँचाने,

सीटी खूब बजाती है।

नदिया पर्वत जंगल घाटी,

सबसे करती खेल चली।

रेल चली भाई रेल चली,

छुक छुक करती रेल चली।


बारिश जाड़ा या हो गर्मी,

सतत चले बनकर पथ धर्मी।

मुश्किल में यह प्राण बचाए,

भारत भू का मान बढ़ाये।

जितनी भी मुश्किल आ जाएं,

हर मौसम को झेल चली।

रेल चली भाई रेल चली,

छुक छुक करती रेल चली।

★★★★★★★★★★

डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"



       शारदे वंदन

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माँ शारदे प्रथम तुम्हें वंदन है,

तेरे पग में पावन अभिनंदन है।

अपने बच्चों को माता मत तरसाना,

प्रेमसुधा नित ही माँ हम पर बरसाना।


तेरे पद रज पाए हम भी,

जो सूची चंदन है।

माँ शारदे प्रथम तुम्हें वंदन है,

तेरे पग में पावन अभिनंदन है।

★☆★★★★★★★★

डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"



           गुरु वंदना

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गुरुवर से जब ज्ञान मिलेंगे,

सुख के सुरभित फूल खिलेंगे।

हमकों करते कुंदन गढ़कर,

और नहीं कुछ गुरु से बढ़कर।


हमकों करते जो ध्रुव तारे,

गुरुवर शिक्षक पूज्य हमारे।

गुरुवर ही है भाग्य विधाता,

बात समझ लो बहना भ्राता।

★★★★★★★★★★

डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"



           किताब

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हर शिष्यों का जन्म सँवारे,

यह किताब है मित्र हमारे।

मन में ज्ञान सुधा भरते है,

हर प्रश्नों का हल करते है।


पढ़ लिखकर है ज्ञानी बनना,

मत लोभी अभिमानी बनना।

शिक्षा के हम गीत सुनाए,

निज भारत का मान बढ़ाये।

★★★★★★★★★★★

डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"



छत्तीसगढ़ की पावन माटी

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छत्तीसगढ़ की पावन माटी,

त्यौहारों की शभ परिपाटी।

जन्म भूमि यह प्यारा लगता,

इस दुनिया से न्यारा लगता।


कहलाता हैं धान कटोरा,

यही  हरेली तीजा पोरा।

छेरछेरा मनभावन अपना,

छत्तीसगढ़ है पावन अपना।

★★★★★★★★★★

डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"


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