कामनवेल्थ गेम

 घनाक्षरी - कामनवेल्थ गेम

★★★★★★★★★★

बजरंग फाड़ रहे ,

सबको पछाड़ रहे।

सिंह की हुँकार और,

बाजुओं में जान है। 


खेल में निभा के रीत, 

दीपक ने पाई जीत।

स्वर्ण का पदक पाके,

बना हुआ शान है ।


साक्षी ने जो काम किया,

बेटियों ने नाम किया।

स्वर्ण देके भारत को,

निभाई विधान है।


खिलाड़ी का बढ़ा बल,

नहीं है कपट छल।

मोदी जी के आने से जो,

भारत महान है।

★★★★★★★★★★


अब दिन रात हुई,

स्वर्ण बरसात हुई।

कुश्ती भारत्तोलन में,

जीत रहे जग को।


मार रहे मुक्केबाज,

धावक के सिर ताज।

अतुलित बल रखे,

वीर रग रग में।


लंबीकूद टेनिस में,

जूडो में भी जीत रहे।

स्वर्ण है बरस रहा,

भारत के पग में।


सिंह सा दहाड़ पाए,

हमे जो पछाड़ पाए।

कहाँ वह बल बचा,

प्रतिद्वंद्वी ठग में।

★★★★★★★


खुशियाँ बरस रही,

भारती हरष रही।

छलिया तरस रही,

शुभ दिन आई है।


प्रीति की निभा के रीत,

जग में दिला के जीत।

खिलाड़ियों ने खेलो में,

स्वर्ण बरसाई है।


जहाँ हो हमारे शेर,

दुनिया वही हो ढेर।

पग-पग भारती का,

मान ही बढ़ाई है।


बुलन्द आवाज हुआ,

अपना ही ताज हुआ।

स्वर्ण पद पा त्रिरँग,

आज लहराई है।

★★★★★★★★

डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"


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