दोहा सृजन

 *दोहा सृजन हेतु शब्द*

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*संसार*


शुचिता के संसार में,निष्ठा का उजियार।

अमर रहे संकल्पना , प्रेम बने आधार।।


*समर्पण*


जहाँ समर्पण है नहीं,वह जीवन है व्यर्थ।

इसलिए संसार में , सभी  चाहते  अर्थ।।


*सौभाग्य*


मानवता की राह में,फलता है सौभाग्य।

पर ऐसे भी हैं कई,जिनका है दुर्भाग्य।।

★★★★★★★★★★★★★★★

डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" ✍️✍️



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