दोहा सृजन
*दोहा सृजन हेतु शब्द*
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*संसार*
शुचिता के संसार में,निष्ठा का उजियार।
अमर रहे संकल्पना , प्रेम बने आधार।।
*समर्पण*
जहाँ समर्पण है नहीं,वह जीवन है व्यर्थ।
इसलिए संसार में , सभी चाहते अर्थ।।
*सौभाग्य*
मानवता की राह में,फलता है सौभाग्य।
पर ऐसे भी हैं कई,जिनका है दुर्भाग्य।।
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डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" ✍️✍️
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