दोहा सृजन
कोहिनूर की आभा
========================
जगदम्बे मातेश्वरी , देती है शुभ ज्ञान।
भक्तों की रक्षा करें,बनकर कृपा निधान।।
कोहिनूर मन से करो,द्वेष कपट का त्याग।
तब जागे मनभाव में,भक्ति का अनुराग।।
परम पुण्य नवरात्रि में,कर लो माँ का ध्यान।
सुख वैभव शुभ श्रेष्ठता,और मिले शुचि ज्ञान।।
पुण्य करो मनभाव को,और निखारो गात्र।
धन्य बनाओ जन्म को ,आया है नवरात्र।।
★★★★★★★★★★★★★★★★
डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" ✍️✍️
Comments
Post a Comment