बाबा घासीदास

 विधाता छंद - बाबा गुरुघासीदास

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अगर संसार के जन में,कभी सन्त्रास बढ़ता है।

कलुषता छद्म छल विपदा,जहाँ पर त्रास बढ़ता है।

सजे जब सत्य अंतस में,तभी विश्वास बढ़ता है।

मिटाने हर कलुषता को,तभी यह दास बढ़ता है।


नैन निज खोलकर अपनी,ज्ञान का सार गहना है।

सभी को संग लेना है, सभी को संग रहना है।

प्रेम रसधार में हमको,द्वेषता त्याग बहना है।

सभी मानव बराबर है,यह घासी का कहना है।


किसी से भेद मत करना,सदा सम्मान ही करना।

बढ़े पिछड़े सभी आगे,यही अवदान नित करना।

जगत उत्थान करने को,सभी का पीर है हरना।

हृदय में हर मनुजता का,परम् विश्वास है भरना।


लोभ छल दंभ द्वेषों का,जहाँ संसार होता है।

वहीं मानव भटकता है,जहाँ पर हार होता है।

सत्य के राह में चलना,जनम का सार होता है।

जहाँ घासी कृपा करते,जनम उद्धार होता है 

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 डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" ✍️✍️✍️






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