दोहा सृजन

                 कोहिनूर की आभा

===========================

छंदमाल्य का मंच यह,पावन छंद विधान।

हम सब साधक के लिए, अनुपम है वरदान।।


गुरुवर का कर वंदना,पाओ शुभ आशीष।

प्रेम भक्ति श्रद्धा सहित,नित्य झुकाओ शीश।।


जिनगी है परिकल्पना, उनको करूँ प्रणाम।

छंदमाल्य के मंच का, सफल रहे हर काम।।


सनातनी विज्ञान का,हम सब करें प्रसार।

भारत में साहित्य का,छंद बने आधार।।


भावों की परिकल्पना, पावन परम विधान।

छंदमाल्य से प्राप्त हो,छंद सृजन का ज्ञान।।

★★★★★★★★★★★★★★★★

डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" ✍️✍️


Comments

Popular posts from this blog

घनाक्षरी - तिरंगे की शान

भाईचारा पर दोहे

मुक्तक - विदाई