दोहा सृजन

 *दोहा सृजन हेतु शब्द*


*1 - विधिवत*


विधिवत सब होता रहे,शासन का हर काम।

जनता के दरबार में, सदा रहे सुखधाम।।


*2 - वितान*


जीवन की इस दौड़ में, सिर पर रहे वितान।

शिखर सदा सर्वोच्च हो, बढ़े जगत सम्मान।।


*3 - विध्वंस*


प्रेम-भाव सद्भावना, पावन रहे विचार।

नहीं कभी विध्वंस हो, सुखी रहे संसार।।


★★★★★★★★★★★★★★★★

डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" ✍️✍️

Comments

Popular posts from this blog

घनाक्षरी - तिरंगे की शान

भाईचारा पर दोहे

मुक्तक - विदाई