दोहा सृजन
*दोहा सृजन हेतु शब्द*
*1 - विधिवत*
विधिवत सब होता रहे,शासन का हर काम।
जनता के दरबार में, सदा रहे सुखधाम।।
*2 - वितान*
जीवन की इस दौड़ में, सिर पर रहे वितान।
शिखर सदा सर्वोच्च हो, बढ़े जगत सम्मान।।
*3 - विध्वंस*
प्रेम-भाव सद्भावना, पावन रहे विचार।
नहीं कभी विध्वंस हो, सुखी रहे संसार।।
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डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" ✍️✍️
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