विडंबना
दलित छात्र इंद्र की हत्या (विडंबना)
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हाय विधाता जाने कैसी ये,अब विडंबना आई है।
छोटे छोटे बच्चों पर भी,आज मुसीबत छाई है।।
शिक्षा के मंदिर में भारी,अब भी तो हैवानी है।
इस भारत में मानवता की,कितनी बुरी कहानी है।।
इंद्र मेघवाल की घटना ने,मानवता शर्मसार किया।
जातिवाद व छुआछूत से,छैलसिंग ने वार किया।।
ऊँच नीच व भेदभाव का,कब तक चलेगा खेल।
ऐसी निर्दयी को हो फाँसी, होना नही अब जेल।।
आरक्षण के विरोधी सुन लो,आरक्षण सभी हटवा दो।
मानव धर्म एक बनाकर,जातिवाद जड़ से मिटवा दो।।
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डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर" ✍️✍️✍️
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