कोहिनूर की आभा

कोहिनूर की आभा
★★★★★★★★

पूरी - पूरी  ढाँक  ली , मेघों  ने आकाश ।
पावस में दिखता नही,अब तो सूर्य प्रकाश।।

देख छटा संसार की , मन है भाव विभोर।
मतवाली कोयल करें,अनुपम मधुरिम शोर।।

जब मन है कामना,तब बनते है काम।
मन के पावन प्रेम से,सदा मिले है राम।।
★★★★★★★★★★★★★★★
रचनाकार-डिजेन्द्र कुर्रे "कोहिनूर"
पीपरभावना,बलौदाबाजार(छ.ग.)
मो. 8120587822 


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